भारत के क्विक कॉमर्स सेक्टर में सरकार ने एक अहम नीतिगत बदलाव करते हुए ‘10 मिनट डिलीवरी’ की बाध्यकारी समय सीमा समाप्त कर दी है। श्रम एवं रोजगार मंत्री मनसुख मांडविया के हस्तक्षेप के बाद ब्लिंकिट, जेप्टो, जोमैटो और स्विगी जैसी प्रमुख कंपनियों ने अपने तेज़ डिलीवरी दावों में संशोधन करने पर सहमति जताई है।
यह निर्णय डिलीवरी पार्टनर्स पर बढ़ते दबाव, सड़क दुर्घटनाओं की आशंका और असुरक्षित कार्य परिस्थितियों को देखते हुए लिया गया है। सरकार का मानना है कि अत्यधिक तेज डिलीवरी मॉडल श्रमिकों की सेहत और सुरक्षा के लिए जोखिम भरा साबित हो रहा था।
सरकारी निर्देश के बाद बदलाव धरातल पर दिखने लगा है। ब्लिंकिट ने अपनी ब्रांडिंग से ‘10 मिनट’ का उल्लेख हटाकर उत्पादों की व्यापक रेंज और भरोसेमंद सेवा को प्राथमिकता देना शुरू कर दिया है। यह संकेत देता है कि कंपनियां अब केवल गति के बजाय गुणवत्ता और सुरक्षा पर ध्यान देंगी।
हालिया संसद सत्र में भी गिग वर्कर्स के अधिकारों का मुद्दा प्रमुखता से उठा। सांसदों ने ऐप-आधारित प्लेटफॉर्म्स के लिए स्पष्ट नियामक ढांचे और सामाजिक सुरक्षा सुनिश्चित करने की मांग रखी। इसी दिशा में सोशल सिक्योरिटी कोड 2020 को लागू किया गया है, जिसमें गिग और प्लेटफॉर्म वर्कर्स को कानूनी संरक्षण प्रदान किया गया है।
इस कानून के तहत दुर्घटना बीमा, स्वास्थ्य सेवाएं, मातृत्व लाभ और वृद्धावस्था सुरक्षा जैसी योजनाओं का प्रावधान किया गया है। साथ ही ई-श्रम पोर्टल के माध्यम से श्रमिकों का पंजीकरण कर उन्हें सरकारी लाभों से जोड़ने की व्यवस्था भी की गई है।
विशेषज्ञों के अनुसार, 10 मिनट डिलीवरी की रेस का खत्म होना भारत की गिग इकोनॉमी में संतुलन और जिम्मेदारी की ओर बढ़ता कदम है, जहां नवाचार के साथ-साथ श्रमिकों का सम्मान भी सुनिश्चित किया जाएगा।
