महासमुंद धान घोटाला: 81 हजार क्विंटल अनाज गायब, बहानों में उलझा प्रशासन

धान भंडारण पर बड़ा सवाल: महासमुंद में करोड़ों का नुकसान, जांच संदेह के घेरे में

CG DARSHAN
CG DARSHAN 2 Min Read
2 Min Read
Advertisement Carousel

छत्तीसगढ़ के महासमुंद जिले में धान भंडारण व्यवस्था एक बड़े विवाद में घिर गई है। जिले के पांच प्रमुख धान संग्रहण केंद्रों से 81,620 क्विंटल धान के गायब होने की पुष्टि हुई है, जिससे सरकारी खजाने को लगभग 25 करोड़ 30 लाख रुपये की चपत लगी है। यह मामला तब सामने आया जब राइस मिलरों द्वारा धान उठाने के बाद स्टॉक मिलान किया गया।

यह धान खरीफ विपणन सत्र 2024–25 के दौरान खरीदे गए 110 लाख क्विंटल से अधिक अनाज का हिस्सा था, जिसे महासमुंद, बागबाहरा, पिथौरा, बसना और सरायपाली स्थित केंद्रों में सुरक्षित रखने का दावा किया गया था। आश्चर्यजनक रूप से, इन केंद्रों में रखरखाव पर 2.5 करोड़ रुपये से अधिक खर्च किए गए थे।

इसके बावजूद, इतनी बड़ी मात्रा में धान का गायब होना प्रशासनिक लापरवाही या संभावित अनियमितताओं की ओर इशारा कर रहा है। संग्रहण केंद्र प्रभारियों ने अपने जवाबों में चूहे, गाय, दीमक, कीड़े-पतंगे और प्रतिकूल मौसम को जिम्मेदार ठहराया है, लेकिन अधिकारियों के लिए ये स्पष्टीकरण संतोषजनक नहीं हैं।

राजनीतिक स्तर पर भी यह मामला गरमा गया है। कांग्रेस ने इसे सुनियोजित भ्रष्टाचार बताते हुए राज्य सरकार और प्रशासन पर गंभीर आरोप लगाए हैं। पार्टी नेताओं का कहना है कि धान खरीदी प्रक्रिया में कट और कमीशन के चलते यह घोटाला सामने आया है। कांग्रेस ने पूरे मामले की उच्च स्तरीय और निष्पक्ष जांच की मांग की है।

फिलहाल, प्रशासन ने संग्रहण केंद्र प्रभारियों को नोटिस जारी कर आठ बिंदुओं पर स्पष्टीकरण मांगा है। हालांकि, सभी केंद्रों से लगभग एक जैसे जवाब आने से जांच की निष्पक्षता पर सवाल खड़े हो रहे हैं। यह मामला शासन-प्रशासन की पारदर्शिता और जवाबदेही की परीक्षा बन चुका है।

Share This Article
Leave a comment