हिरासत में कैदियों की सेहत पर सुप्रीम कोर्ट सख्त, सोनम वांगचुक की विशेषज्ञ जांच के निर्देश

हिरासत में स्वास्थ्य अधिकारों पर सुप्रीम कोर्ट का सख्त संदेश, सोनम वांगचुक की मेडिकल जांच के आदेश

CG DARSHAN
CG DARSHAN 3 Min Read
3 Min Read
Advertisement Carousel

हिरासत में रखे गए व्यक्तियों की स्वास्थ्य सुविधाओं को लेकर सुप्रीम कोर्ट ने एक अहम टिप्पणी करते हुए सख्त रुख अपनाया है। जलवायु कार्यकर्ता सोनम वांगचुक की सेहत से जुड़ी शिकायतों पर सुनवाई करते हुए अदालत ने उनकी विशेषज्ञ चिकित्सक से मेडिकल जांच कराने के निर्देश दिए हैं।

यह आदेश ऐसे समय आया है, जब सोनम वांगचुक राजस्थान की जोधपुर सेंट्रल जेल में राष्ट्रीय सुरक्षा कानून (NSA) के तहत निरुद्ध हैं।

सुप्रीम कोर्ट ने क्या कहा?

सुप्रीम कोर्ट ने स्पष्ट किया कि 59 वर्षीय सोनम वांगचुक की जांच केवल जेल डॉक्टर तक सीमित नहीं रहनी चाहिए। अदालत ने निर्देश दिए कि उनकी जांच किसी अनुभवी विशेषज्ञ डॉक्टर, विशेष रूप से गैस्ट्रोएंटरोलॉजिस्ट, द्वारा कराई जाए। साथ ही जांच रिपोर्ट को सीलबंद लिफाफे में तय समय सीमा के भीतर कोर्ट में पेश करने का आदेश भी दिया गया।

दूषित पानी से बिगड़ी तबीयत का आरोप

सुनवाई के दौरान वांगचुक की पत्नी गितांजलि अंग्मो की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता कपिल सिब्बल ने अदालत को बताया कि सोनम वांगचुक लंबे समय से पेट से जुड़ी गंभीर परेशानियों का सामना कर रहे हैं। उनका आरोप है कि जेल में उपलब्ध कराया जा रहा दूषित पानी उनकी बीमारी की मुख्य वजह है। इसके साथ ही सुरक्षित पेयजल और नियमित स्वास्थ्य निगरानी की मांग भी रखी गई।

सरकार का पक्ष

राजस्थान सरकार की ओर से पेश वकील ने बताया कि पिछले चार महीनों में 21 बार जेल डॉक्टर द्वारा वांगचुक की जांच की गई है। सरकार के अनुसार, हालिया मेडिकल रिपोर्ट में उनका ब्लड प्रेशर सामान्य है और पेट या छाती में किसी गंभीर बीमारी के संकेत नहीं मिले हैं। इसके अलावा उन्हें आवश्यक दवाइयां और विटामिन बी-12 भी दिया गया है।

विशेषज्ञ जांच पर कोर्ट की जोर

हालांकि सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि बार-बार सामान्य जांच होना पर्याप्त नहीं है। अदालत ने माना कि वांगचुक की शिकायतों को देखते हुए विशेषज्ञ डॉक्टर की जांच जरूरी है। अतिरिक्त सॉलिसिटर जनरल के.एम. नटराज ने कोर्ट को आश्वासन दिया कि किसी सरकारी अस्पताल के विशेषज्ञ से जांच कराई जाएगी और रिपोर्ट नियमानुसार सौंपी जाएगी।

क्यों एनएसए के तहत हिरासत?

सोनम वांगचुक को 26 सितंबर को लद्दाख में छठी अनुसूची की मांग को लेकर हुए प्रदर्शनों के बाद एनएसए के तहत हिरासत में लिया गया था। इन घटनाओं में चार लोगों की मौत और लगभग 90 लोग घायल हुए थे। सरकार का आरोप है कि वांगचुक ने हिंसा भड़काने में भूमिका निभाई। एनएसए के तहत किसी व्यक्ति को अधिकतम 12 महीने तक हिरासत में रखा जा सकता है।

Share This Article
Leave a comment