RBI MPC बैठक: UPI फ्रॉड पर 25 हजार तक मुआवजा, रेपो रेट स्थिर; MSME और किसानों को राहत

MPC के अहम निर्णय: UPI फ्रॉड पर मुआवजा, ब्याज दरों में कोई बदलाव नहीं

CG DARSHAN
CG DARSHAN 4 Min Read
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डिजिटल लेनदेन के तेजी से बढ़ते उपयोग के बीच भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) ने उपभोक्ताओं के हित में महत्वपूर्ण फैसला लिया है। मौद्रिक नीति समिति (MPC) की ताजा बैठक में RBI ने स्पष्ट किया कि UPI के माध्यम से हुए फ्रॉड मामलों में ग्राहकों को 25 हजार रुपये तक का मुआवजा दिया जाएगा। यह कदम डिजिटल भुगतान प्रणाली में भरोसा बढ़ाने की दिशा में अहम माना जा रहा है।

एमपीसी ने मौजूदा आर्थिक परिस्थितियों को ध्यान में रखते हुए रेपो रेट को 5.25 प्रतिशत पर यथावत रखने का निर्णय लिया है। इससे पहले केंद्रीय बैंक ने महंगाई को काबू में रखने के लिए पिछले एक वर्ष में 125 बेसिस पॉइंट की कटौती कर बाजार से अतिरिक्त नकदी को नियंत्रित किया था। आरबीआई के अनुसार, वर्तमान में बाजार में लगभग दो लाख करोड़ रुपये की तरलता बनी हुई है।

महंगाई दर को लेकर RBI ने भरोसा जताया है कि आने वाले समय में कीमतों पर नियंत्रण बना रहेगा। नए वित्त वर्ष की पहली तिमाही में महंगाई 4 प्रतिशत और दूसरी तिमाही में 4.2 प्रतिशत रहने का अनुमान व्यक्त किया गया है। इसके साथ ही, MSME सेक्टर और किसानों को कर्ज उपलब्ध कराने की प्रक्रिया को सरल बनाने के संकेत भी दिए गए हैं।

MSME सेक्टर के लिए राहत भरे संकेत

RBI ने छोटे और मझोले उद्योगों को प्रोत्साहित करने के लिए 10 लाख रुपये तक बिना गारंटी कर्ज की सुविधा को और आसान बनाने की योजना पर काम करने की बात कही है। इसके अलावा, कर्ज सीमा बढ़ाने के प्रस्ताव से छोटे कारोबारियों को पूंजी मिलने और रोजगार के नए अवसर पैदा होने की उम्मीद है। यह पहल केंद्र सरकार के 2026-27 के बजट में घोषित निवेश और रोजगार बढ़ाने की रणनीति से मेल खाती है।

किसानों के लिए कर्ज नियमों में बदलाव की तैयारी

किसान क्रेडिट कार्ड (KCC) योजना के तहत किसानों को मिलने वाले लाभ को और व्यापक बनाने के लिए RBI नियमों में बदलाव पर विचार कर रहा है। इसका उद्देश्य अधिक किसानों तक सस्ते और सुलभ कर्ज को पहुंचाना है। इस प्रक्रिया को डिजिटल रूप से मजबूत करने के लिए एक समर्पित पोर्टल जारी करने की योजना भी बनाई गई है।

विकास दर अनुमान और विदेशी निवेश

वैश्विक अनिश्चितताओं के बावजूद RBI ने भारत की आर्थिक विकास दर 7.4 प्रतिशत रहने का अनुमान जताया है, जो पहले के अनुमान से अधिक है। साथ ही, सीमित उपभोक्ता लेनदेन वाली कंपनियों में विदेशी निवेश की सीमा बढ़ाने के प्रस्ताव से विदेशी पूंजी के प्रवाह को बढ़ावा मिलने की संभावना जताई गई है।

शेयर बाजार में उतार-चढ़ाव

एमपीसी के फैसलों के दौरान शेयर बाजार में गिरावट देखने को मिली। विदेशी निवेशकों की बिकवाली से बाजार पर दबाव बना रहा। हालांकि, RBI के अनुसार देश का विदेशी मुद्रा भंडार 723.8 अरब डॉलर पर स्थिर है और सोने की खरीद से रुपये की स्थिति में सुधार की उम्मीद जताई गई है।

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