पश्चिम बंगाल में विधानसभा चुनाव से पहले सियासी समीकरण तेजी से बदल रहे हैं। ऑल इंडिया मजलिस-ए-इत्तेहादुल मुस्लिमीन और आम जनता उन्नयन पार्टी के बीच गठबंधन की घोषणा ने चुनावी मुकाबले को और दिलचस्प बना दिया है।
कोलकाता में आयोजित प्रेस कॉन्फ्रेंस में AIMIM प्रमुख असदुद्दीन ओवैसी ने दावा किया कि राज्य में अल्पसंख्यक और कमजोर वर्गों को पर्याप्त प्रतिनिधित्व नहीं मिल रहा और उनका गठबंधन इसी खालीपन को भरने की कोशिश करेगा।
TMC पर गंभीर आरोप
असदुद्दीन ओवैसी ने तृणमूल कांग्रेस पर निशाना साधते हुए कहा कि पार्टी ने मुस्लिम वोट तो हासिल किए, लेकिन उनके विकास के लिए कोई ठोस पहल नहीं की।
उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि मुख्यमंत्री ममता बनर्जी की नीतियों ने अप्रत्यक्ष रूप से भारतीय जनता पार्टी को राज्य में मजबूत किया है।
गठबंधन की रणनीति
AIMIM और AJUP का कहना है कि उनका फोकस राज्य के वंचित वर्गों को सशक्त बनाना और उन्हें राजनीतिक प्रतिनिधित्व दिलाना है।
हुमायूं कबीर ने बताया कि यह गठबंधन 182 सीटों पर उम्मीदवार उतारेगा और यदि किसी दल को स्पष्ट बहुमत नहीं मिलता, तो यह गठबंधन सत्ता गठन में अहम भूमिका निभा सकता है।
चुनाव की पूरी टाइमलाइन
पश्चिम बंगाल की 294 सीटों वाली विधानसभा के लिए मतदान 23 और 29 अप्रैल को दो चरणों में होगा। मतगणना 4 मई को की जाएगी।
क्या बदलेगा राजनीतिक समीकरण?
विशेषज्ञों का मानना है कि AIMIM-AJUP गठबंधन से राज्य में खासकर अल्पसंख्यक वोट बैंक में बदलाव देखने को मिल सकता है।
असदुद्दीन ओवैसी ने कहा कि लोकतंत्र में हर मतदाता को अपनी पसंद के अनुसार वोट देने का अधिकार है और उनका गठबंधन इसी विकल्प को मजबूत करेगा।

