ग्रामीण सहकार बढ़ेगा, किसानों की आय और रोजगार को मिलेगी नई मजबूती

CG DARSHAN
CG DARSHAN 3 Min Read
3 Min Read
Advertisement Carousel

प्रदेश में ग्रामीण सहकार को लगातार विस्तार दिया जा रहा है। मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने कहा कि सहकारिता किसानों की आय बढ़ाने का मजबूत माध्यम बन चुकी है। इसके साथ ही ग्रामीण अर्थव्यवस्था को भी नई दिशा मिल रही है। सरकार गांवों तक योजनाओं का लाभ पहुंचाने के लिए लगातार काम कर रही है।

मुख्यमंत्री ने यह बात रायपुर में आयोजित राज्य स्तरीय सहकारी सम्मेलन में कही। कार्यक्रम सहकारिता मंत्रालय के पांच वर्ष पूरे होने के अवसर पर आयोजित हुआ।

मुख्य बातें

  • 1352 नई सहकारी समितियों का गठन किया गया।
  • 162 करोड़ रुपये की प्रोत्साहन राशि जारी हुई।
  • 7.14 लाख तेंदूपत्ता संग्राहकों को मिलेगा लाभ।
  • किसानों को ब्याज मुक्त ऋण की सुविधा मिल रही है।
  • महिला स्व-सहायता समूहों को लाभांश वितरित किया गया।
  • उत्कृष्ट सहकारी समितियों को सम्मानित किया गया।

ग्रामीण सहकार से किसानों को मिल रही नई ताकत

मुख्यमंत्री ने कहा कि वह किसान परिवार से आते हैं। इसलिए सहकारिता की उपयोगिता को करीब से समझते हैं। उन्होंने बताया कि आज किसान कम लागत पर ऋण प्राप्त कर रहे हैं। इससे खेती का खर्च संभालना आसान हुआ है। वहीं आर्थिक सुरक्षा भी मजबूत हुई है।

उन्होंने बताया कि इस वर्ष 15 लाख से अधिक किसानों को आठ हजार करोड़ रुपये से ज्यादा का ऋण दिया गया। इससे खेती के लिए समय पर वित्तीय सहायता मिली।

ग्रामीण सहकार का दायरा लगातार बढ़ रहा

ग्रामीण सहकार अब केवल खेती तक सीमित नहीं है। सरकार पशुपालन, दुग्ध उत्पादन, मत्स्य पालन और वनोपज को भी बढ़ावा दे रही है। इसके अलावा ग्रामीण उद्यमिता को मजबूत करने पर भी विशेष ध्यान दिया जा रहा है। इससे गांवों में रोजगार और स्वरोजगार दोनों बढ़ेंगे।

डिजिटल सेवाओं से बढ़ेगी पारदर्शिता

सम्मेलन के दौरान मुख्यमंत्री ने सहकारिता विभाग का नया ऑनलाइन पोर्टल शुरू किया। इससे किसानों का पंजीयन पहले से अधिक आसान होगा। पूरी प्रक्रिया पारदर्शी और समयबद्ध तरीके से पूरी की जाएगी।

कार्यक्रम में पांच नई पैक्स समितियों को माइक्रो एटीएम भी दिए गए। इसके अलावा छत्तीसगढ़ हर्बल्स के पांच नए उत्पादों का लोकार्पण किया गया।

हितग्राहियों को मिला योजनाओं का लाभ

ग्रामीण सहकार को मजबूत करने के उद्देश्य से कई हितग्राहियों को सामग्री वितरित की गई। महिला स्व-सहायता समूहों को लाभांश दिया गया। तेंदूपत्ता संग्राहकों को सम्मानित किया गया। विभिन्न सहकारी संस्थाओं के स्टॉलों ने भी लोगों का ध्यान आकर्षित किया। सम्मेलन में किसानों और सहकारी संस्थाओं की बड़ी भागीदारी रही।

Share This Article
Leave a comment