राजधानी दिल्ली में आयोजित Quad Foreign Ministers Meet ने वैश्विक कूटनीति में एक नई दिशा देने का काम किया है। भारत, अमेरिका, जापान और ऑस्ट्रेलिया के विदेश मंत्रियों की इस महत्वपूर्ण बैठक में हिंद-प्रशांत क्षेत्र की सुरक्षा, आर्थिक स्थिरता और रणनीतिक सहयोग को लेकर व्यापक चर्चा की गई।
बैठक के दौरान विदेश मंत्री डॉ. एस जयशंकर ने स्पष्ट किया कि क्वाड देशों का लक्ष्य केवल चर्चा तक सीमित नहीं है, बल्कि साझा चुनौतियों के समाधान के लिए ठोस कार्रवाई करना भी है।
हिंद-प्रशांत क्षेत्र रहेगा प्राथमिक एजेंडा
डॉ. एस जयशंकर ने कहा कि Quad Foreign Ministers Meet का मुख्य उद्देश्य हिंद-प्रशांत क्षेत्र को स्वतंत्र, सुरक्षित और समावेशी बनाए रखना है। उन्होंने कहा कि वैश्विक सप्लाई चेन में लगातार आ रही बाधाएं और संसाधनों का सीमित क्षेत्रों में केंद्रित होना दुनिया के लिए बड़ी चुनौती बन चुका है।
इसके अलावा उन्होंने भरोसेमंद आर्थिक साझेदारी और मजबूत कनेक्टिविटी नेटवर्क तैयार करने की आवश्यकता पर भी बल दिया। वहीं क्वाड देशों को क्षेत्रीय स्थिरता के लिए मिलकर काम करने की जरूरत बताई गई।
समुद्री सुरक्षा पर बढ़ा फोकस
बैठक में समुद्री सुरक्षा, क्रिटिकल इंफ्रास्ट्रक्चर और आपदा राहत जैसे मुद्दों पर भी अहम चर्चा हुई। Quad Foreign Ministers Meet में सदस्य देशों ने अंडरसी केबल, महत्वपूर्ण खनिजों और तकनीकी सहयोग के क्षेत्र में साझेदारी मजबूत करने का निर्णय लिया।
विशेषज्ञों के अनुसार, हिंद-प्रशांत क्षेत्र में बढ़ते सामरिक तनाव के बीच क्वाड की यह एकजुटता रणनीतिक संतुलन बनाए रखने में अहम भूमिका निभा सकती है।
ऑस्ट्रेलिया ने भारत को बताया अहम साझेदार
ऑस्ट्रेलिया की विदेश मंत्री पेनी वोंग ने भारत को हिंद-प्रशांत क्षेत्र की एक प्रभावशाली शक्ति बताते हुए कहा कि Quad Foreign Ministers Meet साझा लोकतांत्रिक मूल्यों और संप्रभुता की रक्षा का महत्वपूर्ण मंच बन चुका है।
उन्होंने कहा कि चारों देशों के अपने-अपने हित जरूर हैं, लेकिन इसके बावजूद सभी का लक्ष्य एक मुक्त और खुले हिंद-प्रशांत क्षेत्र का निर्माण करना है। इसके साथ ही उन्होंने प्राकृतिक आपदाओं के दौरान क्वाड की सक्रिय भूमिका की भी सराहना की।
वैश्विक रणनीति में बढ़ेगा क्वाड का प्रभाव
दिल्ली में हुई Quad Foreign Ministers Meet ने यह संकेत दिया है कि आने वाले समय में क्वाड देश वैश्विक आर्थिक और रणनीतिक मामलों में अधिक प्रभावशाली भूमिका निभा सकते हैं।
इसी बीच विशेषज्ञों का मानना है कि भारत की अगुवाई में क्वाड समूह हिंद-प्रशांत क्षेत्र में स्थिरता और सुरक्षा का मजबूत आधार बन सकता है।

