भारत रक्षा क्षेत्र में लगातार नए कीर्तिमान स्थापित कर रहा है। वित्त वर्ष 2025-26 में जहां देश का रक्षा उत्पादन 1.78 लाख करोड़ रुपये तक पहुंचा, वहीं रक्षा निर्यात भी रिकॉर्ड 38,424 करोड़ रुपये पर पहुंच गया। यह उपलब्धि भारत की बढ़ती विनिर्माण क्षमता और वैश्विक बाजार में बढ़ते प्रभाव को दर्शाती है।
उत्पादन बढ़ने से निर्यात को मिली नई रफ्तार
विशेषज्ञों का मानना है कि घरेलू रक्षा उत्पादन में वृद्धि का सीधा लाभ विदेशी बाजारों में देखने को मिला है। भारत अब कई देशों को रक्षा उपकरण, तकनीक और सैन्य प्रणालियां उपलब्ध करा रहा है।
आत्मनिर्भरता से मजबूत हुआ रक्षा क्षेत्र
सरकार की नीतियों और स्वदेशी निर्माण पर जोर के कारण भारतीय कंपनियां आधुनिक रक्षा उत्पाद विकसित करने में सफल रही हैं। इसका सकारात्मक असर रक्षा निर्यात के आंकड़ों में साफ दिखाई दे रहा है।
FY26 में दर्ज हुआ नया रिकॉर्ड
रक्षा मंत्रालय के अनुसार, FY26 में भारत ने 38,424 करोड़ रुपये का निर्यात किया, जो अब तक का सर्वोच्च स्तर है। यह पिछले वर्षों की तुलना में बड़ी उपलब्धि मानी जा रही है।
दुनिया के कई देशों में बढ़ी मांग
भारतीय रक्षा उपकरणों की गुणवत्ता और प्रतिस्पर्धी कीमतों के कारण अंतरराष्ट्रीय बाजार में उनकी मांग बढ़ रही है। इससे रक्षा निर्यात के लिए नए अवसर पैदा हुए हैं।
निजी क्षेत्र की भागीदारी बनी सफलता की कुंजी
सरकारी कंपनियों के साथ-साथ निजी उद्योगों ने भी रक्षा क्षेत्र में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। FY26 में निजी क्षेत्र का योगदान 42,000 करोड़ रुपये तक पहुंच गया।
आधुनिक तकनीक ने बढ़ाई प्रतिस्पर्धा
नई तकनीकों और अनुसंधान में निवेश से भारतीय कंपनियां वैश्विक मानकों के अनुरूप उत्पाद तैयार कर रही हैं। इससे रक्षा निर्यात को और मजबूती मिली है।
राजनाथ सिंह ने बताई उपलब्धि की अहमियत
रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने इस सफलता को आत्मनिर्भर भारत अभियान का परिणाम बताया। उन्होंने कहा कि देश का रक्षा औद्योगिक आधार लगातार मजबूत हो रहा है और आने वाले वर्षों में और बेहतर परिणाम देखने को मिलेंगे।
भविष्य में और बढ़ सकता है निर्यात
सरकार का लक्ष्य भारत को रक्षा उपकरणों के प्रमुख वैश्विक आपूर्तिकर्ताओं में शामिल करना है। इसके लिए निर्यात प्रक्रिया को सरल और उद्योगों को प्रोत्साहित किया जा रहा है।
भारत की वैश्विक स्थिति हुई मजबूत
रिकॉर्ड उत्पादन और बढ़ते रक्षा निर्यात ने भारत को दुनिया के उभरते रक्षा विनिर्माण केंद्रों में शामिल कर दिया है। इससे विदेशी निवेश और रणनीतिक साझेदारियों की संभावनाएं भी बढ़ी हैं।

