तमिलनाडु के तिरुवल्लुवर जिले में हुए औद्योगिक हादसे ने पूरे राज्य को झकझोर कर रख दिया है। एक निजी सीफूड प्रोसेसिंग इकाई में हुए अमोनिया गैस रिसाव के कारण पांच महिला श्रमिकों की मौत हो चुकी है, जबकि कई अन्य अस्पतालों में उपचाराधीन हैं। हादसे के बाद राजनीतिक बयानबाजी भी तेज हो गई है।
कैसे हुआ यह दर्दनाक हादसा?
बताया गया है कि 21 जून को एक सीफूड प्रोसेसिंग और निर्यात इकाई में नियमित कार्य के दौरान पाइपलाइन से गैस का रिसाव शुरू हो गया। कुछ ही समय में वहां मौजूद श्रमिक इसकी चपेट में आ गए।
बड़ी संख्या में महिलाएं हुईं प्रभावित
अधिकारियों के अनुसार कुल 74 श्रमिक प्रभावित हुए, जिनमें 70 महिलाएं शामिल थीं। अमोनिया गैस रिसाव के चलते कई कर्मचारियों को सांस लेने में दिक्कत, आंखों में जलन और सीने में दर्द जैसी समस्याओं का सामना करना पड़ा।
मृतकों की संख्या बढ़कर पांच हुई
स्वास्थ्य विभाग ने पुष्टि की है कि दो महिला श्रमिकों की मौत घटना वाले दिन हुई थी, जबकि तीन अन्य महिलाओं ने इलाज के दौरान दम तोड़ दिया। इससे हादसे की गंभीरता और बढ़ गई है।
पीड़ित परिवारों को मिलेगी सहायता
राज्य सरकार ने मृतकों के परिजनों के लिए दो-दो लाख रुपये की आर्थिक सहायता की घोषणा की है। साथ ही पार्थिव शरीरों को उनके गृह राज्यों तक पहुंचाने का खर्च भी सरकार उठाएगी।
जांच के लिए गठित हुई विशेष समिति
मुख्यमंत्री ने स्वास्थ्य विभाग और प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के अधिकारियों की संयुक्त जांच टीम बनाई है। टीम को जल्द रिपोर्ट प्रस्तुत करने के निर्देश दिए गए हैं।
लापरवाही मिलने पर होगी कार्रवाई
सरकार ने स्पष्ट किया है कि अमोनिया गैस रिसाव की जांच में यदि सुरक्षा मानकों की अनदेखी या संचालन संबंधी कोई चूक सामने आती है, तो दोषियों के खिलाफ सख्त कानूनी कदम उठाए जाएंगे।
विधानसभा में विपक्ष का हंगामा
हादसे को लेकर विपक्षी दलों ने सरकार पर तीखे सवाल उठाए। विधानसभा में मंत्री के बयान के दौरान कई बार व्यवधान पैदा हुआ और विपक्ष ने घटना पर विस्तृत चर्चा की मांग की।
एआईएडीएमके ने किया वॉकआउट
विपक्ष का आरोप है कि औद्योगिक इकाइयों में सुरक्षा मानकों की निगरानी पर्याप्त नहीं थी। इसी मुद्दे को लेकर एआईएडीएमके सदस्यों ने सदन से वॉकआउट कर विरोध दर्ज कराया। अमोनिया गैस रिसाव अब राजनीतिक बहस का भी केंद्र बन गया है।
औद्योगिक सुरक्षा पर उठे सवाल
विशेषज्ञों का मानना है कि इस तरह की घटनाएं औद्योगिक क्षेत्रों में सुरक्षा मानकों की समीक्षा की आवश्यकता को दर्शाती हैं। श्रमिकों की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए नियमित निरीक्षण और आपातकालीन प्रबंधन व्यवस्था को मजबूत करना जरूरी है।
भविष्य में हादसे रोकने की चुनौती
सरकार और संबंधित एजेंसियों के सामने अब यह चुनौती है कि अमोनिया गैस रिसाव जैसी घटनाओं की पुनरावृत्ति न हो। इसके लिए जांच रिपोर्ट के आधार पर नए सुरक्षा उपाय लागू किए जा सकते हैं।

