West Asia War Impact: UNDP रिपोर्ट में बड़ा खुलासा, GDP ग्रोथ से आगे निकला नुकसान

CG DARSHAN
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पश्चिम एशिया में जारी युद्ध अब केवल राजनीतिक या सैन्य संघर्ष नहीं रह गया है, बल्कि यह एक बड़े आर्थिक संकट का रूप लेता जा रहा है। संयुक्त राष्ट्र की ताजा रिपोर्ट ने संकेत दिए हैं कि इस संघर्ष की कीमत क्षेत्रीय अर्थव्यवस्थाओं को भारी नुकसान के रूप में चुकानी पड़ रही है।

रिपोर्ट के मुताबिक, यह युद्ध 2025 में हुई कुल जीडीपी वृद्धि से भी अधिक आर्थिक नुकसान पहुंचा चुका है। जैसे-जैसे यह तनाव लंबा खिंच रहा है, इसका असर वैश्विक अर्थव्यवस्था तक फैलता जा रहा है।

GDP पर गंभीर चोट

संयुक्त राष्ट्र विकास कार्यक्रम (UNDP) के अनुसार, पश्चिम एशिया की अर्थव्यवस्थाओं को उनकी कुल जीडीपी का 3.7% से 6% तक नुकसान झेलना पड़ सकता है। यह नुकसान 194 अरब डॉलर तक पहुंच सकता है, जो पिछले साल की आर्थिक उपलब्धियों को पीछे छोड़ देता है।

रोजगार बाजार पर दबाव

इस संकट का सबसे बड़ा असर रोजगार पर पड़ने की आशंका है। रिपोर्ट में कहा गया है कि बेरोजगारी दर में करीब 4 प्रतिशत अंकों की वृद्धि हो सकती है, जिससे लगभग 36 लाख नौकरियां खत्म हो सकती हैं। यह आंकड़ा पिछले वर्ष सृजित नौकरियों से भी अधिक है।

गरीबी में इजाफा तय

आर्थिक संकट का सीधा असर आम लोगों पर पड़ने वाला है। रिपोर्ट के अनुसार, करीब 40 लाख लोग गरीबी रेखा के नीचे जा सकते हैं। इससे सामाजिक असंतुलन और आर्थिक असमानता और गहरी हो सकती है।

मानव विकास को झटका

युद्ध के कारण मानव विकास सूचकांक (HDI) में भी गिरावट देखने को मिल सकती है। अनुमान है कि HDI में 0.2% से 0.4% तक की कमी आएगी, जिससे क्षेत्र की विकास गति आधे से एक वर्ष तक पीछे जा सकती है।

संरचनात्मक कमजोरियां बनीं बड़ी चुनौती

रिपोर्ट में यह स्पष्ट किया गया है कि पश्चिम एशिया की अर्थव्यवस्थाओं की पहले से मौजूद कमजोरियां इस संकट को और गंभीर बना रही हैं। अल्पकालिक सैन्य संघर्ष भी यहां दीर्घकालिक आर्थिक समस्याएं पैदा कर सकता है।

UN की चेतावनी और सुझाव

संयुक्त राष्ट्र के सहायक महासचिव अब्दल्लाह अल दरदारी ने इस स्थिति को एक अहम मोड़ बताते हुए कहा कि देशों को अपनी आर्थिक नीतियों में बदलाव करना होगा। उन्होंने कहा कि हाइड्रोकार्बन आधारित अर्थव्यवस्था से हटकर विविधीकरण, क्षेत्रीय सहयोग और मजबूत व्यापारिक ढांचे पर ध्यान देना जरूरी है।

उन्होंने यह भी सुझाव दिया कि लॉजिस्टिक्स, उत्पादन और अंतरराष्ट्रीय साझेदारियों को मजबूत बनाकर ही भविष्य में ऐसे संकटों के प्रभाव को कम किया जा सकता है।

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